बेबीलोन के झूलते बाग़: प्रेम, रहस्य और एक खोए हुए स्वर्ग की अमर कहानी

प्राचीन विश्व के सात अजूबों में वह एकमात्र चमत्कार जो आज भी मिला नहीं, जो शायद कभी था ही नहीं, और फिर भी जिसने हजारों साल से इंसान की कल्पना को आग लगाए रखी

कल्पना कीजिए एक ऐसे बाग़ की जो रेगिस्तान के बीच उठी हो। जहाँ सीढ़ी-दर-सीढ़ी हरियाली हो, झरने बहते हों, फूलों की महक हवा में घुली हो और ऊँचाई पर जाते-जाते वह बाग़ आसमान को छूने लगे। दूर से देखने पर एक हरा पहाड़ लगे जो किसी रेगिस्तान में अचानक उग आया हो।

यही थे बेबीलोन के झूलते बाग़ यानी “हैंगिंग गार्डन्स ऑफ बेबीलोन” (Hanging Gardens of Babylon)

प्राचीन विश्व के सात अजूबों में से एक, यह बाग़ सबसे रहस्यमय, सबसे रोमांटिक और सबसे विवादास्पद अजूबा है। बाकी सभी अजूबों के बारे में हम जानते हैं कि वे कहाँ थे और कैसे दिखते थे। लेकिन बेबीलोन के झूलते बाग़ के बारे में हम आज भी निश्चित नहीं हैं कि वे वास्तव में थे भी या नहीं।

और यही अनिश्चितता इसे सबसे अधिक आकर्षक बनाती है।

एक राजा ने अपनी रानी की उदासी मिटाने के लिए रेगिस्तान में स्वर्ग बनाने की कोशिश की। यह कहानी केवल इतिहास की नहीं, यह प्रेम, शक्ति, इंजीनियरिंग की प्रतिभा और उस अदृश्य रेखा की कहानी है जो सत्य और किंवदंती के बीच हमेशा धुंधली रही है।

आज हम इस महान रहस्य को परत दर परत उघाड़ेंगे।

बेबीलोन: वह महान शहर जिसने दुनिया को चकित किया

बेबीलोन के झूलते बाग़ को समझने के लिए पहले बेबीलोन शहर को समझना जरूरी है।

बेबीलोन (Babylon) मेसोपोटामिया की सभ्यता का सबसे महान शहर था। यह आधुनिक इराक में हिल्लाह (Hillah) के पास, बग़दाद से लगभग 85 किलोमीटर दक्षिण में स्थित था। यह फरात नदी (Euphrates River) के किनारे बसा था।

मेसोपोटामिया का अर्थ ग्रीक में है “दो नदियों के बीच की भूमि” यानी फरात (Euphrates) और दजला (Tigris) के बीच का क्षेत्र। यही क्षेत्र “उपजाऊ अर्धचंद्र” (Fertile Crescent) का हिस्सा था जिसे मानव सभ्यता का उद्गम स्थल माना जाता है।

बेबीलोन का इतिहास 2300 ईसा पूर्व तक जाता है। लेकिन इसने अपनी सबसे बड़ी महानता नव-बेबीलोनियन साम्राज्य (Neo-Babylonian Empire) के दौर में हासिल की, जिसका सबसे प्रतापी शासक था नेबुकदनेज़्ज़र द्वितीय (Nebuchadnezzar II)

उस दौर में बेबीलोन दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे समृद्ध शहर था। यूनानी इतिहासकार स्ट्राबो (Strabo) ने लिखा कि इसकी दीवारें 7 किलोमीटर लंबी, कुछ जगह 10 मीटर मोटी और 20 मीटर ऊँची थीं और इन पर नियमित अंतराल पर ऊँचे बुर्ज थे।

शहर में था वह प्रसिद्ध “इश्तार गेट” (Ishtar Gate) जिसकी नीली चमकदार टाइलों पर बैल और ड्रैगन की आकृतियाँ थीं। आज इसके अवशेष बर्लिन के पेर्गामोन संग्रहालय में सुरक्षित हैं। इसी शहर में था “बाबेल का टॉवर” (Tower of Babel) जिसका उल्लेख बाइबल में भी है। और इसी शहर में कहीं थे वे बाग़ जिन्होंने दुनिया भर के यात्रियों, कवियों और इतिहासकारों को सदियों तक मंत्रमुग्ध रखा।

नेबुकदनेज़्ज़र द्वितीय: वह योद्धा-राजा जिसने बेबीलोन को अमर किया

नेबुकदनेज़्ज़र द्वितीय नव-बेबीलोनियन साम्राज्य के सबसे महान शासक थे। वे 605 ईसा पूर्व में सिंहासन पर बैठे और 562 ईसा पूर्व तक यानी 43 वर्षों तक शासन किया।

प्राचीन विश्व के इतिहास में 43 वर्षों का शासन असाधारण लंबा माना जाता था।

उनका शासन दो विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है।

पहली विशेषता थी विजय और युद्ध। नेबुकदनेज़्ज़र ने मिस्र, सीरिया, फिनीशिया और अनेक क्षेत्रों पर विजय पाई। उनकी सबसे कुख्यात उपलब्धि थी 597 ईसा पूर्व में यरूशलेम पर आक्रमण और 586 ईसा पूर्व में यहूदी मंदिर को नष्ट करना। हजारों यहूदियों को बंदी बनाकर बेबीलोन लाया गया जिसे इतिहास में “बेबीलोन की बंधुता” (Babylonian Captivity) कहते हैं। यह घटना यहूदी और ईसाई धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्णित है।

दूसरी विशेषता थी भव्य निर्माण। नेबुकदनेज़्ज़र महान निर्माता थे। उन्होंने बेबीलोन को दुनिया का सबसे सुंदर शहर बनाने की कोशिश की। उन्होंने इश्तार गेट, विशाल महल, मंदिर और सड़कें बनवाईं। और इन्हीं के समय के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने वे बाग़ बनवाए जो दुनिया के अजूबे बन गए।

वह प्रेम कहानी जिसने एक रेगिस्तान को स्वर्ग बनाया

बेबीलोन के झूलते बाग़ की सबसे प्रचलित कहानी एक गहरे प्रेम और एक रानी की उदासी से शुरू होती है।

किंवदंती के अनुसार नेबुकदनेज़्ज़र ने “अमिटिस” (Amytis) नाम की एक राजकुमारी से विवाह किया। अमिटिस मीडिया (Media) की राजकुमारी थी जो आज के उत्तर-पश्चिमी ईरान का भाग है।

यह विवाह राजनीतिक था। नेबुकदनेज़्ज़र ने मीडियाई राजा क्यैक्सारेस (Cyaxares) के साथ गठबंधन किया और उनकी पुत्री (या पौत्री) अमिटिस से विवाह किया। इस गठबंधन की मदद से दोनों ने मिलकर असीरियन साम्राज्य को नष्ट किया था।

अमिटिस अपनी मातृभूमि मीडिया में बड़ी हुई थी। मीडिया एक पहाड़ी, हरा-भरा और उपजाऊ प्रदेश था। वहाँ की पहाड़ियाँ, घाटियाँ, झरने और हरे जंगल उसके बचपन की यादों में बसे थे।

और बेबीलोन? बेबीलोन एक समतल, धूप में झुलसती, रेगिस्तानी भूमि पर बसा था। फरात नदी के किनारे कुछ हरियाली थी लेकिन चारों ओर धूल, गर्मी और सपाट मैदान था।

रानी अमिटिस को अपनी नई नगरी में बहुत उदासी लगती थी। वह अपनी हरी-भरी पहाड़ी जन्मभूमि को याद करती थी।

नेबुकदनेज़्ज़र का प्रेम उनसे यह उदासी न देखी गई। उन्होंने तय किया कि वे अपनी रानी के लिए उसकी जन्मभूमि ही बेबीलोन में उतार देंगे। उन्होंने रेगिस्तान में एक कृत्रिम पहाड़ बनाने का संकल्प लिया जो हरियाली से ढका हो, जहाँ झरने बहें और जहाँ पहुँचकर रानी को अपनी मातृभूमि की याद आए।

यही वह स्वप्न था जिसने इतिहास का सबसे रहस्यमय अजूबा जन्म दिया।

बाग़ कैसे दिखते थे? प्राचीन लेखकों की आँखों से

चूँकि बाग़ के कोई पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिले हैं, हम केवल प्राचीन ग्रीक और रोमन लेखकों के विवरणों पर निर्भर हैं। इनमें से किसी ने भी बाग़ को सीधे नहीं देखा था। वे सब दूसरों से सुनी-सुनाई बातें लिख रहे थे।

स्ट्राबो का विवरण (पहली सदी ईसा पूर्व)

यूनानी भूगोलविद और इतिहासकार स्ट्राबो (Strabo) ने लिखा:

“बाग़ में चतुष्कोणीय स्तंभों की श्रृंखला है जिन पर खोखली ईंटों की छतें हैं जो पृथ्वी से भरी हैं। वृक्षों की जड़ें वहाँ तक फैली हैं और वे सभी प्रकार के विशाल वृक्षों से आच्छादित हैं। ऊपर की ओर जाने के लिए सीढ़ियाँ हैं और इन्हीं के पास निरंतर पानी खींचने वाले पेंच लगे हैं जो नदी से ऊपर तक पानी पहुँचाते हैं।”

डायोडोरस सिकुलस का विवरण (पहली सदी ईसा पूर्व)

यूनानी इतिहासकार डायोडोरस सिकुलस (Diodorus Siculus) ने लिखा:

“यह बाग़ चार प्लेथ्रा (Plethron) लंबाई और चार प्लेथ्रा चौड़ाई में था और ऊपर-ऊपर उठती सीढ़ियों के रूप में बना था जो थिएटर जैसा दिखता था। इन सीढ़ियों पर गहरी मिट्टी की परत थी जिसमें बड़े-बड़े वृक्ष लगे थे। यह इतनी ऊँचाई पर था कि इसकी चोटी से पूरा इलाका दिखता था।”

फिलो ऑफ बाइज़ेंटियम का विवरण (चौथी-पाँचवीं सदी ईस्वी)

बाइज़ेंटियम के फिलो ने लिखा:

“ऊँचे स्थानों पर इतनी गहरी मिट्टी भरी थी कि उसमें बड़े-बड़े वृक्षों की जड़ें फैल सकती थीं। यह बाग़ सीढ़ियों की तरह ऊपर उठता था और हर सीढ़ी पर बाग़ का एक नया क्षेत्र था।”

इन सभी विवरणों को मिलाकर जो चित्र उभरता है वह इस प्रकार है:

बाग़ सीढ़ीनुमा छतों (Terraces) की एक श्रृंखला थी जो एक के ऊपर एक उठती थीं। हर छत पर गहरी मिट्टी भरी थी जिसमें बड़े-बड़े पेड़, झाड़ियाँ, फूल और बेलें लगी थीं। इसकी ऊँचाई लगभग 23 मीटर (75 फीट) के आसपास बताई जाती है। दूर से यह एक हरे पहाड़ या विशाल हरी सीढ़ीनुमा संरचना जैसा दिखता था। पानी को ऊपर तक पहुँचाने के लिए एक उन्नत सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया जाता था।

“झूलते” बाग़ का नाम कहाँ से आया?

एक सामान्य गलतफहमी है कि “झूलते बाग़” का अर्थ है कि पेड़ हवा में झूल रहे थे या बाग़ किसी चीज़ से लटका हुआ था।

यह सही नहीं है।

“हैंगिंग” शब्द यूनानी शब्द “क्रेमास्टोस” (kremastós) के अनुवाद से आया है। इस शब्द का अर्थ है “ऊपर की ओर फैला हुआ” या “छज्जे या छत पर लगा हुआ”। यानी पेड़ और बेलें छतों के किनारों से नीचे की ओर झुकती और लहराती थीं जो दूर से देखने पर “झूलती” लगती थीं।

लैटिन में इसे “pensilis hortus” कहा गया जिसका अर्थ है “ऊँचे छज्जे का बाग़”

तो “झूलता” शब्द बाग़ के उस दृश्य का वर्णन करता है जिसमें पत्तियाँ और बेलें ऊँची छतों से नीचे की ओर लटकती और झूलती थीं।

इंजीनियरिंग का चमत्कार: रेगिस्तान में पानी कैसे पहुँचाया गया?

अगर बाग़ सच में थे तो उनकी सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती थी सिंचाई

बेबीलोन का क्षेत्र बहुत कम वर्षा वाला था। फरात नदी पास थी लेकिन उस पानी को दसियों मीटर ऊपर तक पहुँचाना अत्यंत कठिन काम था।

प्राचीन लेखकों ने इस समस्या के कुछ समाधान बताए हैं।

पेंच पंप (Screw Pump): स्ट्राबो ने उल्लेख किया है कि पेंच के आकार का एक यंत्र पानी को ऊपर तक खींचता था। यह यंत्र आज “आर्किमिडीज़ का पेंच” (Archimedes’ Screw) नाम से जाना जाता है। लेकिन रोचक बात यह है कि आर्किमिडीज़ तीसरी सदी ईसा पूर्व में हुए थे, जबकि बाग़ का निर्माण छठी सदी ईसा पूर्व में बताया जाता है। यानी यह यंत्र आर्किमिडीज़ से कम से कम 300 साल पहले बेबीलोन में था।

चेन पंप (Chain Pump): एक अन्य सिद्धांत के अनुसार पानी की बाल्टियों की एक श्रृंखला को एक चेन पर लगाकर घुमाया जाता था। जब बाल्टियाँ नीचे होती थीं तो पानी से भर जाती थीं और जब ऊपर पहुँचती थीं तो उड़ेल देती थीं।

मानव-चालित पहिया (Water Wheel): श्रमिकों या जानवरों द्वारा घुमाया जाने वाला एक बड़ा पहिया भी पानी खींचने में काम आ सकता था।

जर्मन पुरातत्वविद रॉबर्ट कोल्डेवे (Robert Koldewey) ने 1899 में बेबीलोन में खुदाई करते समय कुछ असामान्य मेहराबदार तहखानों और एक कुएँ की खोज की जो तीन शाफ्टों से जुड़ा था। यह संरचना उन्हें लगी कि पानी उठाने के लिए बनाई गई थी। उन्होंने इसे बाग़ का आधार मानकर अपनी खोज की घोषणा की। लेकिन बाद में यह कमरे अनाज-भंडार निकले।

वह भव्य संरचना जो बाग़ को थामे थी

बाग़ की इंजीनियरिंग केवल सिंचाई तक सीमित नहीं थी। इतने भारी बोझ को थामने वाली नींव और दीवारें बनाना भी उतना ही बड़ा काम था।

फिलो ऑफ बाइज़ेंटियम ने लिखा कि बाग़ की नींव पत्थर के ऊँचे स्तंभों पर टिकी थी। इन स्तंभों पर खोखली ईंटों की छतें थीं। इन छतों पर सीसे की मोटी परत (lead sheets) बिछाई गई थी ताकि पानी रिसकर नीचे न जाए। सीसे के ऊपर ईंटें और बिटुमेन (bitumen) की परत थी। और इस सब के ऊपर गहरी उपजाऊ मिट्टी भरी थी।

यह एक आदिम लेकिन कुशल “वाटरप्रूफिंग” तकनीक थी।

मिट्टी इतनी गहरी थी कि उसमें बड़े-बड़े वृक्षों की जड़ें फैल सकती थीं। यानी बाग़ में केवल छोटे फूल या झाड़ियाँ नहीं, बल्कि विशाल वृक्ष भी थे।

ब्रिटिश पुरातत्वविद लियोनार्ड वूली (Leonard Woolley) ने एक सिद्धांत दिया कि बाग़ वास्तव में ज़िग्गुरात (Ziggurat) यानी बेबीलोन के सीढ़ीनुमा मंदिर-टॉवर जैसी संरचना पर बने थे। ज़िग्गुरात की हर सीढ़ी पर बाग़ लगाया गया होगा।

बेरोसस: वह पहला साक्ष्य जो दूसरे के शब्दों में आया

बेबीलोन के झूलते बाग़ का सबसे पुराना उल्लेख लगभग 290 ईसा पूर्व में मिलता है। यह उल्लेख बेरोसस (Berossus) नाम के एक बेबीलोनी पुरोहित और इतिहासकार ने किया था।

बेरोसस मर्दुक देवता के पुजारी थे और उन्होंने “बेबीलोनिका” (Babyloniaca) नाम से एक ग्रंथ लिखा था। इसमें उन्होंने नेबुकदनेज़्ज़र के महल और बाग़ों का वर्णन किया।

लेकिन रोचक बात यह है कि बेरोसस का मूल ग्रंथ आज उपलब्ध नहीं है। हम उनका विवरण केवल यहूदी इतिहासकार जोसेफस (Josephus) की पहली सदी ईस्वी की रचना के हवाले से जानते हैं जिसमें बेरोसस को उद्धृत किया गया है।

यानी यह एक ऐसा साक्ष्य है जो तीसरे व्यक्ति के माध्यम से हम तक पहुँचा है।

जोसेफस ने बेरोसस के हवाले से लिखा:

“महल में उन्होंने बहुत ऊँची दीवारें बनवाईं जो पत्थर के खंभों पर टिकी थीं। और जो ‘झूलता स्वर्ग’ (pensile paradise) कहलाता था, उसे सभी प्रकार के वृक्षों से सुसज्जित किया और उस दृश्य को पहाड़ी देश जैसा बना दिया। यह उन्होंने अपनी रानी को प्रसन्न करने के लिए किया क्योंकि वह मीडिया में पली थी और पहाड़ी प्रकृति को पसंद करती थी।”

वह महान विवाद: बाग़ बेबीलोन में थे या नीनवे में?

यहाँ इतिहास एक बड़े मोड़ पर आता है।

दशकों की खुदाई के बाद भी बेबीलोन में बाग़ का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। इससे एक बड़ा प्रश्न उठा: क्या बाग़ बेबीलोन में थे ही?

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रख्यात अश्शूरविद (Assyriologist) डॉ. स्टेफनी डैली (Dr. Stephanie Dalley) ने दो दशकों के शोध के बाद 2013 में एक क्रांतिकारी सिद्धांत प्रस्तुत किया।

उनकी पुस्तक “The Mystery of the Hanging Garden of Babylon: An Elusive World Wonder Traced” (Oxford University Press) में उन्होंने तर्क दिया कि:

बाग़ बेबीलोन में नहीं थे। वे बेबीलोन से 300 मील उत्तर में नीनवे (Nineveh) में थे जो असीरियन साम्राज्य की राजधानी थी और जो आधुनिक मोसुल (Mosul), इराक के पास है।

और उन्हें नेबुकदनेज़्ज़र ने नहीं, बल्कि असीरियन राजा सेनाकेरीब (Sennacherib) ने बनाया था जिनका शासनकाल 704 से 681 ईसा पूर्व था यानी नेबुकदनेज़्ज़र से करीब 100 साल पहले

डैली के तर्क:

पहला तर्क यह है कि नेबुकदनेज़्ज़र के अपने शिलालेखों में बाग़ का कोई उल्लेख नहीं है जबकि उन्होंने अपनी अन्य निर्माण गतिविधियों का विस्तार से वर्णन किया है।

दूसरा तर्क यह है कि सेनाकेरीब के शिलालेखों में एक “अतुलनीय महल और अद्भुत बाग़” का उल्लेख है। उन्होंने स्वयं लिखा है कि उन्होंने बाग़ में पानी ऊपर तक पहुँचाने के लिए “पेंच के यंत्र” (screw devices) का उपयोग किया।

तीसरा तर्क यह है कि सेनाकेरीब के पोते असुरबानिपाल (Assurbanipal) के महल में एक नक्काशीदार दीवार-पट्टिका मिली है जिसमें एक हरे-भरे बाग़ का चित्रण है जिसके ऊपर एक जलसेतु (aqueduct) है।

चौथा तर्क यह है कि सेनाकेरीब ने 689 ईसा पूर्व में बेबीलोन को नष्ट किया था और नीनवे को “नया बेबीलोन” कहा था। उन्होंने नीनवे के शहर-द्वारों के नाम बेबीलोन के शहर-द्वारों के नाम पर रखे। इसलिए बाद के यूनानी लेखकों ने “बेबीलोन” सुनकर उसे वास्तविक बेबीलोन समझ लिया जबकि वे नीनवे की बात कर रहे थे।

पाँचवाँ तर्क यह है कि नीनवे के पास खुदाई में एक विशाल जलसेतु प्रणाली के अवशेष मिले हैं जो पहाड़ों से पानी लाती थी। इस पर शिलालेख है: “सेनाकेरीब, दुनिया के राजा… मैंने एक जलमार्ग बनाया जो नीनवे के बाहरी इलाकों तक पहुँचाया।”

यह सिद्धांत अभी भी बहस का विषय है। कई इतिहासकार इससे सहमत नहीं हैं और परंपरागत स्थल बेबीलोन को ही सही मानते हैं।

तीन सिद्धांत: बाग़ थे, नहीं थे, या कहीं और थे?

इतिहासकारों में बेबीलोन के झूलते बाग़ के बारे में तीन प्रमुख विचारधाराएं हैं।

पहला सिद्धांत: बाग़ बेबीलोन में थे

यह परंपरागत मत है। प्राचीन ग्रीक और रोमन स्रोत इन्हें बेबीलोन में रखते हैं। यह मानते हैं कि बाग़ का निर्माण नेबुकदनेज़्ज़र ने किया था और वे बाद में भूकंप, बाढ़ या युद्ध से नष्ट हो गए।

दूसरा सिद्धांत: बाग़ केवल एक कल्पना थे

कुछ विद्वानों का मानना है कि बाग़ वास्तव में अस्तित्व में नहीं थे। उनका तर्क है कि सिकंदर महान की सेना जब बेबीलोन पहुँची तो वे उस विशाल शहर की समृद्धि, ऊँचे महल और विदेशी पेड़-पौधों से इतनी प्रभावित हुई कि वापस लौटने पर उन्होंने बढ़ा-चढ़ाकर कहानियाँ सुनाईं। इन कहानियों को ग्रीक कवियों और इतिहासकारों ने अपनी कल्पना से सजाया और “झूलते बाग़” जन्म ले लिए।

तीसरा सिद्धांत: बाग़ नीनवे में थे

डॉ. स्टेफनी डैली का उपरोक्त सिद्धांत। यह आज का सबसे नया और सबसे तर्कसंगत सिद्धांत माना जा रहा है।

पुरातत्व की चुप्पी: वह खोज जो कभी पूरी नहीं हुई

1899 में जर्मन पुरातत्वविद रॉबर्ट कोल्डेवे ने बेबीलोन में व्यवस्थित खुदाई शुरू की। यह खुदाई 1917 तक चली यानी करीब 20 साल

इस खुदाई में कई महत्वपूर्ण चीजें मिलीं जैसे इश्तार गेट, दोहरी शहरपनाह, नेबुकदनेज़्ज़र का दक्षिणी महल और अनेक मंदिर। लेकिन बाग़ का कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिला।

कोल्डेवे ने उत्तरी महल के एक कोने में 14 मेहराबदार कमरों की एक असामान्य संरचना खोजी। इसमें एक कुआँ था जो तीन शाफ्टों से जुड़ा था जो कोल्डेवे को लगा कि पानी उठाने के लिए बनाया गया था। उन्होंने उत्साह से घोषणा की कि यही बाग़ का आधार है।

लेकिन बाद में उसी स्थान पर प्रशासनिक दस्तावेज लिखी हुई पट्टियाँ (clay tablets) मिलीं जिनसे स्पष्ट हुआ कि ये कमरे अनाज-भंडार और प्रशासनिक कार्यालय थे, बाग़ का आधार नहीं।

एक अन्य खुदाई में नदी के किनारे के महल-खंड में बड़े नाले, दीवारें और एक जलाशय जैसी संरचनाएं मिलीं जो सिंचाई व्यवस्था की ओर संकेत करती हैं लेकिन निश्चित प्रमाण नहीं हैं।

बेबीलोन की एक और बड़ी समस्या यह है कि प्राचीन शहर के कई हिस्से आज भूजल स्तर से नीचे हैं या आधुनिक गाँवों और शहरों के नीचे दबे हैं जहाँ खुदाई करना संभव नहीं है।

प्राचीन विश्व के सात अजूबों की सूची में शामिल होने का सफर

बेबीलोन के झूलते बाग़ को सात अजूबों की सूची में कब और कैसे स्थान मिला, यह भी एक रोचक कहानी है।

“प्राचीन विश्व के सात अजूबे” की अवधारणा यूनानी यात्रियों और लेखकों की देन है। यह एक प्रकार की “यात्रा बकेट-लिस्ट” थी जो उस युग के महान दर्शनीय स्थलों का संकलन था।

सबसे पुरानी ऐसी सूची साइडन के एन्टिपेटर (Antipater of Sidon) ने 140 ईसा पूर्व के आसपास बनाई थी। बाद में बाइज़ेंटियम के फिलो और अन्य लेखकों ने इसे और परिष्कृत किया।

बेबीलोन के झूलते बाग़ इस सूची में इसलिए आए क्योंकि वे सबसे विदेशी, रहस्यमय और अकल्पनीय लगते थे। बाकी सभी अजूबे यूनानी या भूमध्यसागरीय संस्कृति के करीब थे। लेकिन ये बाग़ पूरब के उस रहस्यमय बेबीलोन में थे जो यूनानियों की कल्पना में एक स्वप्नलोक था।

एक सिद्धांत यह भी है कि इन्हें सूची में शामिल करने में सिकंदर महान (Alexander the Great) की भूमिका थी। सिकंदर 331 ईसा पूर्व में बेबीलोन आए और कुछ समय वहाँ रहे। उनकी सेना के वर्णन ने पूरे यूनानी जगत को बेबीलोन की महानता से परिचित कराया।

बाग़ का अंत: नष्ट हुए तो कैसे?

अगर बाग़ थे भी, तो वे कहाँ गए? कई सिद्धांत हैं।

भूकंप: मेसोपोटामिया का क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है। एक शक्तिशाली भूकंप इतनी जटिल सिंचाई संरचना को नष्ट कर सकता था।

नदी का मार्ग बदलना: फरात नदी का मार्ग समय के साथ बदलता रहा है। यदि नदी बाग़ से दूर हो गई तो पानी की आपूर्ति बाधित होकर बाग़ सूख गया होगा।

युद्ध और लूट: बेबीलोन पर कई आक्रमण हुए। 539 ईसा पूर्व में फारसी सम्राट साइरस महान (Cyrus the Great) ने बेबीलोन को जीत लिया। 331 ईसा पूर्व में सिकंदर आए। इन युद्धों में शहर के साथ बाग़ भी नष्ट हो सकते थे।

उपेक्षा: एक बार सिंचाई प्रणाली का रखरखाव बंद हो जाए तो बाग़ अपने आप सूख जाते।

मिट्टी में दफन: यह भी संभव है कि बाग़ के अवशेष आज भी बेबीलोन की मिट्टी के नीचे कहीं दबे हों जिन तक पहुँचना अभी तक संभव नहीं हो पाया।

बेबीलोन आज: खंडहरों में एक महान सभ्यता की साँसें

आज बेबीलोन इराक के बाबिल प्रांत में स्थित है। यहाँ खंडहर हैं, कुछ पुनर्निर्मित दीवारें हैं और एक छोटा संग्रहालय है।

1983 में इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने नेबुकदनेज़्ज़र के महल का आंशिक पुनर्निर्माण करवाया। इसमें ईंटों पर उनका अपना नाम भी लिखवाया जिसे पुरातत्वविदों ने एक बड़ी ऐतिहासिक भूल माना।

2003 के इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी और पोलिश सेनाओं ने बेबीलोन के पास एक सैन्य शिविर बनाया जिससे प्राचीन स्थल को भारी नुकसान पहुँचा।

2019 में यूनेस्को ने “प्राचीन बेबीलोन शहर” को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।

बेबीलोन के बाग़ और बाइबल: एक और आयाम

बेबीलोन का उल्लेख बाइबल में कई स्थानों पर मिलता है। नेबुकदनेज़्ज़र के बारे में दानिएल की पुस्तक (Book of Daniel) में विस्तृत वर्णन है।

बुक ऑफ डेनियल में एक प्रसिद्ध घटना है जब नेबुकदनेज़्ज़र ने स्वयं की एक विशाल सोने की मूर्ति बनवाई और सबको उसे प्रणाम करने का आदेश दिया। तीन यहूदियों ने इनकार किया तो उन्हें आग में फेंक दिया गया। किंवदंती के अनुसार वे आग में अक्षत रहे।

इन्हीं नेबुकदनेज़्ज़र के बारे में बाइबल में एक और कहानी है कि उनका दिमाग चला गया और वे सात साल तक घास खाते रहे जब तक उन्होंने ईश्वर की महानता स्वीकार नहीं की।

यह बाइबिल की कहानियाँ उस व्यक्ति के बारे में हैं जिन्होंने संभवतः अपनी रानी के लिए दुनिया का सबसे सुंदर बाग़ बनाया।

बेबीलोन के झूलते बाग़ के रोचक तथ्य

ये प्राचीन विश्व के सात अजूबों में एकमात्र ऐसा अजूबा है जिसका कोई पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिला। ये एकमात्र अजूबा है जिसकी स्थान-पहचान अभी तक निश्चित नहीं हुई। यूनानी शब्द “kremastós” के गलत अनुवाद से “झूलते” शब्द आया जबकि असली अर्थ “ऊपर की ओर फैले” था। इन्हें “दुनिया का पहला रूफटॉप गार्डन” भी कहा जाता है। सेनाकेरीब के महल की नक्काशी में बाग़ का जो चित्र मिला है वह नीनवे में है, बेबीलोन में नहीं। प्राचीन यूनानी लेखकों में से किसी ने भी बाग़ को सीधे नहीं देखा था। डॉ. स्टेफनी डैली का सिद्धांत आज सबसे अधिक चर्चित है। बाग़ में उगने वाले पेड़-पौधे शायद खजूर, देवदार, ओक, कैपर और अंगूर जैसे पौधे थे।

निष्कर्ष: जो मिला नहीं, उसकी यादें अमर हैं

बेबीलोन के झूलते बाग़ की कहानी का सबसे गहरा सत्य यह है कि यह केवल ईंट, मिट्टी और पानी की कहानी नहीं है।

यह उस मानवीय आकांक्षा की कहानी है जो असंभव को संभव करना चाहती है। एक राजा का अपनी रानी से वह प्रेम जिसने उसे रेगिस्तान में पहाड़ उगाने पर मजबूर किया। वह इंजीनियरिंग का जुनून जिसने पानी को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपर तक पहुँचाया। और वह मानवीय कल्पना जिसने भले ही बाग़ का एक पत्थर न देखा हो, उसे इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर कर दिया।

इतिहास का एक गहरा सत्य यह भी है कि जो चीज़ें खो जाती हैं, वे अक्सर जीवित चीज़ों से अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं। क्योंकि उनकी जगह कल्पना आ बैठती है और कल्पना की कोई सीमा नहीं होती।

गीज़ा के पिरामिड आज भी खड़े हैं और हम उन्हें देखकर चकित होते हैं। लेकिन बेबीलोन के झूलते बाग़ जो कभी मिले ही नहीं, उनके बारे में हम सदियों से स्वप्न देखते आए हैं।

और शायद यही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।

एक प्रेम जो किसी को भी रेगिस्तान में स्वर्ग बनाने पर मजबूर कर दे, वह प्रेम कभी खोता नहीं। वह पत्थरों में नहीं, दिलों में बसता है।

“बेबीलोन के झूलते बाग़ इतिहास का सबसे सुंदर रहस्य हैं। शायद इसलिए भी क्योंकि कुछ चीजें खोजे जाने पर अपनी जादुई शक्ति खो देती हैं।”

संदर्भ स्रोत: Wikipedia, World History Encyclopedia, Britannica, History.com, TheCollector, AllThatsInteresting, ArtInContext, 7Wonders.org, Oxford University Press (Stephanie Dalley)

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