मेक्सिको के युकाटान प्रायद्वीप की उस रहस्यमय धरती की पूरी कहानी जहाँ पत्थर सूरज की चाल नापते हैं, पिरामिड पर साँप उतरता है और जमीन के नीचे आज भी हजारों राज दबे पड़े हैं
हर साल 21 मार्च की शाम को एक असाधारण घटना होती है।
मेक्सिको के एक प्राचीन शहर में हजारों लोग एक विशाल पिरामिड के सामने खड़े होते हैं। सूरज धीरे-धीरे ढलता है। और फिर, पिरामिड की उत्तरी सीढ़ी पर एक के बाद एक सात त्रिकोणाकार परछाइयाँ बनने लगती हैं। ये परछाइयाँ ऊपर से नीचे की ओर खिसकती हैं और देखते ही देखते एक विशाल साँप की आकृति बन जाती है जो पिरामिड से नीचे उतर रहा हो जैसे। सीढ़ी के आधार पर पहले से बने पत्थर के साँप के सिर से जब यह परछाईं मिलती है तो लगता है जैसे वह साँप जीवित हो उठा हो।
यह किसी जादूगर की करतूत नहीं है। यह है लगभग 1,200 साल पुरानी माया इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार जिसे आधुनिक वास्तुकार भी देखकर दंग रह जाते हैं।
यह जगह है चिचेन इट्ज़ा (Chichen Itza)।
माया सभ्यता का सबसे महान और सबसे रहस्यमय शहर। दुनिया के सात नए अजूबों में से एक। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। और एक ऐसी जगह जहाँ पुरातत्वविद आज भी हर साल कुछ नया खोज लेते हैं।
आज इस लेख में हम चिचेन इट्ज़ा के इतिहास, स्थापत्य, धर्म, पुरातात्विक खोजों और अनसुलझे रहस्यों की एक विस्तृत यात्रा करेंगे।
चिचेन इट्ज़ा का नाम: एक कुएँ की पवित्र पहचान
“चिचेन इट्ज़ा” नाम माया भाषा के तीन शब्दों से बना है।
“ची” (Chi) का अर्थ है “मुख” या “किनारा”, “चेन” (Ch’en) का अर्थ है “कुआँ” और “इट्ज़ा” (Itza) एक जाति का नाम है जिसका अर्थ है “जल-जादूगर” या “जल-मंत्रकार”।
यानी चिचेन इट्ज़ा का पूरा अर्थ है “इट्ज़ा लोगों के कुएँ के मुहाने पर”।
यह नाम शहर के उत्तरी सिरे पर स्थित पवित्र सेनोटे (Sacred Cenote) की ओर इशारा करता है जो एक प्राकृतिक जलकुंड है और जो इस पूरे शहर की धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक पहचान का केंद्र रहा है।
चिचेन इट्ज़ा कहाँ है?
चिचेन इट्ज़ा मेक्सिको के युकाटान प्रायद्वीप (Yucatan Peninsula) में स्थित है। यह आधुनिक पर्यटन शहर कैनकन (Cancun) से लगभग 193 किलोमीटर पश्चिम में और राज्य की राजधानी मेरिदा (Merida) से लगभग 120 किलोमीटर पूर्व में है।
यह स्थल एक समतल चूना पत्थर के मैदान पर बना है जो समुद्र तल से केवल 22 मीटर ऊँचा है। इसी चूना पत्थर की संरचना के कारण इस पूरे क्षेत्र में भूमि के नीचे असंख्य सेनोटे (cenotes) यानी प्राकृतिक जलकुंड बने हैं जो माया संस्कृति में अत्यंत पवित्र माने जाते थे। शहर का मुख्य पुरातात्विक क्षेत्र लगभग 5 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
माया सभ्यता को समझे बिना चिचेन इट्ज़ा अधूरा है
चिचेन इट्ज़ा की कहानी को पूरी तरह जानने के लिए पहले माया सभ्यता को जानना ज़रूरी है।
माया लोग मेसोअमेरिका (Mesoamerica) की सबसे परिष्कृत और उन्नत सभ्यताओं में से एक थे। उनका विस्तार आधुनिक मेक्सिको, ग्वाटेमाला, बेलीज़, होंडुरास और अल सल्वाडोर तक था।
माया लोगों की उपलब्धियाँ आज भी वैज्ञानिकों को अचंभित करती हैं। उन्होंने शून्य (Zero) की अवधारणा यूरोप से पूरी तरह स्वतंत्र रूप से विकसित की। उनका सौर कैलेंडर इतना सटीक था कि आधुनिक खगोलशास्त्री भी इसे देखकर दाँतों तले उँगली दबा लेते हैं। उन्होंने ग्रहणों और ग्रहों की गतिविधियों की सदियों पहले भविष्यवाणी की। और उन्होंने चित्र-लिपि आधारित पूर्ण लिखित भाषा विकसित की।
माया इतिहास के तीन प्रमुख काल हैं।
पूर्व-क्लासिक काल (2000 ईसा पूर्व से 250 ईसवी): शुरुआती बस्तियाँ और कृषि सभ्यता का विकास।
क्लासिक काल (250 ईसवी से 900 ईसवी): माया सभ्यता का स्वर्णयुग। इसी दौरान तिकाल, कोपान और पालेनके जैसे महान शहर उभरे।
उत्तर-क्लासिक काल (900 ईसवी से 1500 ईसवी): दक्षिणी माया शहरों का पतन और उत्तरी युकाटान में नए केंद्रों का उदय। इसी काल में चिचेन इट्ज़ा सर्वोच्च शिखर पर पहुँचा।
चिचेन इट्ज़ा का इतिहास: 1,500 साल की गाथा
पहला चरण: इट्ज़ा लोगों का आगमन (435 ईसवी से 600 ईसवी)
435 से 550 ईसवी के बीच माया लोगों का एक समूह जो इट्ज़ा कहलाता था, संभवतः कैम्पेचे या ताबास्को क्षेत्र से आकर इस स्थान पर बस गया।
इट्ज़ा लोगों ने पवित्र सेनोटे के आसपास अपनी पहली बस्तियाँ बसाईं। 600 ईसवी तक यह एक पूर्ण नगर का आकार ले चुका था।
इस शुरुआती काल की इमारतें “पुउक शैली” (Puuc Style) में बनाई गईं जो दक्षिणी युकाटान की पारंपरिक माया स्थापत्य शैली थी। इन्हें उनकी जटिल पत्थर की नक्काशी और ज्यामितीय अलंकरण से पहचाना जाता है।
दूसरा चरण: स्वर्णयुग और तोलतेक प्रभाव (900 ईसवी से 1200 ईसवी)
यह चिचेन इट्ज़ा के इतिहास का सबसे रोचक और विवादास्पद अध्याय है।
9वीं शताब्दी तक चिचेन इट्ज़ा युकाटान प्रायद्वीप का सबसे शक्तिशाली शहर बन चुका था। अपने चरम पर यहाँ 50,000 से अधिक लोग रहते थे। शहर से होकर गुजरने वाले व्यापारिक मार्गों से सोना, जेड, फ़िरोज़ा, कोको और पंख जैसे बहुमूल्य सामान आते-जाते थे।
इसी दौरान शहर में एक नई स्थापत्य शैली दिखने लगी जो मध्य मेक्सिको के तोलतेक (Toltec) लोगों से मिलती-जुलती थी। इस प्रभाव को लेकर दो मुख्य सिद्धांत हैं।
पहले सिद्धांत के अनुसार तोलतेक राजा टोपिल्त्ज़िन (Topiltzin) जिन्हें “पंखदार सर्प” (Quetzalcoatl) भी कहा जाता था, को उनके गृहनगर तुला (Tula) से निष्कासित किया गया। माना जाता है कि वे अपने अनुयायियों के साथ युकाटान आए और चिचेन इट्ज़ा में बस गए। माया भाषा में इन्हें “कुकुलकन” (Kukulkan) कहा गया।
दूसरे सिद्धांत के अनुसार यह प्रभाव व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए आया। चिचेन इट्ज़ा, तुला से 1,500 किलोमीटर दूर था लेकिन दोनों शहरों की स्थापत्य समानताएँ इतनी अद्भुत हैं कि किसी न किसी रूप में संपर्क निश्चित था।
इस काल में बनी इमारतें माया और तोलतेक शैलियों का एक अनोखा मिश्रण हैं जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलतीं।
तीसरा चरण: पतन और परित्याग (1200 ईसवी से 1400 ईसवी)
13वीं शताब्दी की शुरुआत में चिचेन इट्ज़ा की ताकत घटने लगी। माया पान (Mayapan) के शासकों ने चिचेन इट्ज़ा को परास्त किया और इट्ज़ा लोगों को शहर से बाहर कर दिया।
1441 में माया पान खुद एक शहरी संघ से हार गया। इसके बाद चिचेन इट्ज़ा प्रमुख राजनीतिक केंद्र के रूप में तो समाप्त हो गया लेकिन एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में जीवित रहा।
15वीं शताब्दी तक शहर लगभग पूरी तरह परित्यक्त हो चुका था।
स्पेनिश विजय और औपनिवेशिक काल (1526 ईसवी के बाद)
1526 ईसवी में जब स्पेनिश विजेता (Conquistadors) युकाटान पहुँचे तो उन्होंने पाया कि चिचेन इट्ज़ा के आसपास अभी भी एक जीवंत समुदाय बसा हुआ है और शहर एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
स्पेनिश ने यहाँ कुछ समय के लिए अपनी अस्थायी राजधानी भी स्थापित की। बाद में इस स्थान को मवेशी पालन के मुख्यालय के रूप में उपयोग किया गया।
चिचेन इट्ज़ा की प्रमुख संरचनाएं: पत्थर में उकेरी गई एक दुनिया
कुकुलकन का पिरामिड: एल कैस्टिलो (El Castillo)
यह चिचेन इट्ज़ा की सबसे प्रसिद्ध और केंद्रीय संरचना है। स्पेनिश में इसे “एल कैस्टिलो” (El Castillo) यानी “किला” कहा जाता है।
यह पिरामिड 24 मीटर (79 फीट) ऊँचा है। इसकी चारों दिशाओं में प्रत्येक तरफ 91 सीढ़ियाँ हैं। चारों तरफ की कुल सीढ़ियाँ 364 होती हैं और शीर्ष का मंच एक अतिरिक्त “सीढ़ी” की तरह है जिससे कुल 365 बनती हैं जो एक वर्ष के दिनों की संख्या है।
पिरामिड में 9 छत-चबूतरे (terraces) हैं जो माया कैलेंडर से जुड़े हैं। प्रत्येक पक्ष पर 52 पैनल हैं जो माया के 52-वर्षीय कैलेंडर चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह कोई संयोग नहीं है। माया इंजीनियरों ने पूरे पिरामिड को एक जीवंत पत्थर के कैलेंडर की तरह बनाया था।
कुकुलकन (Kukulkan) माया सभ्यता का सबसे महत्वपूर्ण देव था जिसे “पंखदार सर्प” कहा जाता था। यह तोलतेक देव क्वेत्ज़ालकोआटल का माया रूप था। माया मान्यता थी कि यह देव स्वर्ग और पाताल के बीच का सेतु था।
2008 से मेक्सिको सरकार ने पर्यटकों का पिरामिड पर चढ़ना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
विषुव पर साँप का उतरना: खगोल और पत्थर का अद्भुत संवाद
हर साल 21 मार्च (वसंत विषुव) और 21 सितंबर (शरद विषुव) को सूर्यास्त से लगभग 3 घंटे पहले यह अद्भुत घटना होती है।
सूरज की रोशनी पिरामिड के उत्तर-पूर्वी कोने की धारों पर इस तरह पड़ती है कि उत्तरी सीढ़ी की रेलिंग पर सात त्रिकोणाकार प्रकाश-खंड बनते हैं। ये खंड धीरे-धीरे ऊपर से नीचे की ओर खिसकते हैं। देखने वालों को ऐसा लगता है जैसे एक विशाल साँप पिरामिड से नीचे उतर रहा हो। अंतिम किरण सीढ़ी के आधार पर पहले से बने पत्थर के साँप के सिर पर पड़ती है।
माया मान्यता थी कि इन दिनों उनके देव कुकुलकन स्वर्ग से धरती पर उतरते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
पवित्र सेनोटे (Sacred Cenote)
यह चिचेन इट्ज़ा का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। यह एक प्राकृतिक जलकुंड (natural sinkhole) है जो शहर के उत्तरी छोर पर एल कैस्टिलो से एक सीधी राह पर स्थित है।
इसकी चौड़ाई 60 मीटर है और यह 27 मीटर गहरा है। पानी की सतह जमीन से लगभग 20 मीटर नीचे है।
माया मान्यता थी कि यह कुआँ वर्षा देव चाक (Chaac) का निवास स्थान है। जब सूखा पड़ता था या कोई बड़ी आपदा आती थी तो माया लोग इस कुएँ में मूल्यवान वस्तुएं और बलि चढ़ाते थे।
योद्धाओं का मंदिर (Temple of the Warriors)
यह एक विशाल स्तंभ-युक्त मंदिर है जो तोलतेक-माया स्थापत्य शैली का सबसे भव्य उदाहरण है।
इसके आगे “हजार स्तंभों का हॉल” (Hall of a Thousand Columns) है जिसमें वास्तव में 200 से अधिक नक्काशीदार पत्थर के स्तंभ हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर चाक मूल (Chac Mool) की मूर्ति है, जो एक अर्ध-लेटी हुई मानव आकृति है जिसके पेट पर एक थाली है। इसका उपयोग बलि के लिए होता था।
महान बॉल कोर्ट (Great Ball Court)
यह मेसोअमेरिका का सबसे बड़ा ज्ञात बॉल कोर्ट है। इसकी लंबाई 166 मीटर और चौड़ाई 68 मीटर है।
यहाँ “पोक-ए-टोक” (Pok-a-Tok) नाम का पवित्र खेल खेला जाता था। इस खेल में रबड़ की गेंद को पत्थर के छल्ले में से गुजारना होता था जो दीवार पर 8 मीटर की ऊँचाई पर लगे थे। खिलाड़ी केवल कूल्हे, घुटने और कोहनी से गेंद को मार सकते थे। हाथ और पाँव वर्जित थे।
बॉल कोर्ट की दीवारों पर नक्काशी में बलिदान के दृश्य हैं। इतिहासकारों में अभी भी विवाद है कि हारने वाले की बलि होती थी या जीतने वाले की। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि जीतने वाले टीम के कप्तान की बलि एक महान सम्मान माना जाता था।
बॉल कोर्ट की एक और अद्भुत विशेषता इसकी ध्वनि प्रणाली है। एक सिरे पर की गई फुसफुसाहट 166 मीटर दूर दूसरे सिरे पर साफ सुनाई देती है। तालियों की आवाज़ कई बार गूँजती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जानबूझकर रची गई ध्वनि-वास्तुकला है।
एल कैरेकोल: वेधशाला (El Caracol)
यह एक गोलाकार वेधशाला है। “कैरेकोल” स्पेनिश में “घोंघे” को कहते हैं और बाहर से यह इमारत एक घोंघे जैसी दिखती है।
इसकी खिड़कियाँ खगोलीय घटनाओं के अनुसार संरेखित हैं। शुक्र ग्रह (Venus) का उदय और अस्त, संक्रांति और विषुव के समय सूरज की स्थिति का अध्ययन यहाँ से किया जाता था।
माया ज्योतिष में शुक्र ग्रह का विशेष महत्व था। युद्ध की घोषणा और महत्वपूर्ण राजकीय अनुष्ठान शुक्र की स्थिति के अनुसार तय किए जाते थे।
ओसारियो: उच्च पुजारी का मकबरा (Ossuary)
इसे “उच्च पुजारी का मकबरा” भी कहते हैं। यह एक छोटा पिरामिड है जो एल कैस्टिलो जैसा दिखता है।
इसके अंदर एक शाफ्ट (shaft) है जो नीचे एक प्राकृतिक गुफा तक जाती है। 1890 के दशक में यहाँ खुदाई में 7 कंकाल और मूल्यवान वस्तुएं मिलीं।
लास मोन्जास (Las Monjas)
यह एक बड़ा और जटिल भवन समूह है। स्पेनिश ने इसे “ननरी” (Nunnery) नाम दिया क्योंकि वे इसे ईसाई ननों के आश्रम जैसा समझते थे। वास्तव में यह एक प्रशासनिक और शाही निवास परिसर था।
लाल घर (Casa Colorada)
यह चिचेन इट्ज़ा की सबसे अच्छी तरह सुरक्षित इमारतों में से एक है। 19वीं शताब्दी के खोजकर्ताओं के समय भी इस पर लाल रंग स्पष्ट दिखता था।
इसके एक कक्ष में 869 ईसवी की तारीख वाले शिलालेख मिले हैं जो चिचेन इट्ज़ा के सबसे पुराने ज्ञात अभिलेखों में से हैं।
आकाब जीब (Akab Dzib)
इस इमारत का माया नाम “अंधेरा लेखन” (Dark Writing) है। नाम इसलिए पड़ा क्योंकि अंदर की हस्तलिपि इतनी सूक्ष्म और जटिल थी कि आरंभिक पुरातत्वविदों को पढ़ने में बड़ी कठिनाई हुई। यह चिचेन इट्ज़ा के प्रशासक का आधिकारिक निवास था।
पुरातात्विक खोजें: जो मिला, जो मिल रहा है और जो अभी भी दफन है
19वीं शताब्दी की पहली नज़र
1840-1841 में अमेरिकी लेखक जॉन लॉयड स्टीफंस (John Lloyd Stephens) और ब्रिटिश चित्रकार फ्रेडरिक कैदरवुड (Frederick Catherwood) ने चिचेन इट्ज़ा का पहला विस्तृत सर्वेक्षण किया। कैदरवुड के अत्यंत सटीक रेखाचित्र आज भी इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हैं।
1875 में ब्रिटिश पुरातत्वविद अल्फ्रेड मॉड्सले (Alfred Maudslay) ने यहाँ विस्तृत फोटोग्राफी और प्लास्टर कास्ट बनाए जो आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित हैं।
एडवर्ड थॉम्पसन और पवित्र सेनोटे का विवादास्पद खजाना (1904 से 1910)
अमेरिकी शौकिया पुरातत्वविद और मेरिदा में अमेरिकी दूत एडवर्ड थॉम्पसन (Edward Thompson) ने 1904 से 1910 के बीच पवित्र सेनोटे को ड्रेज (dredge) करके उसके तल से सामग्री निकाली।
इस खुदाई में मिला: सोने की वस्तुएं, फ़िरोज़ा (turquoise), जेड (jade), ताँबे की वस्तुएं, मिट्टी के बर्तन और मानव अवशेष।
मानव अवशेषों के अध्ययन से पाया गया कि उन पर हड्डियों के घाव थे जो दर्शाते थे कि उन्हें कुएँ में फेंकने से पहले मारा गया था। एक शोध के अनुसार जाँचे गए 42 मानव कंकालों में से आधे से अधिक 20 वर्ष से कम आयु के थे और 14 तो बारह वर्ष से भी कम आयु के थे।
विवाद और मुकदमा: थॉम्पसन ने इन बहुमूल्य वस्तुओं को चुपके से हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पीबॉडी म्यूजियम (Peabody Museum) भेज दिया। 1926 में मेक्सिको सरकार ने उन पर पुरावस्तुओं की तस्करी का आरोप लगाया। थॉम्पसन उस समय अमेरिका में थे और कभी मेक्सिको वापस नहीं लौटे। उन्होंने अपने अनुभव “पीपल ऑफ द सर्पेंट” (People of the Serpent, 1932) नाम की किताब में दर्ज किए। 1944 में मेक्सिकन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निर्दोष ठहराया।
बाद में 1961 और 1967 में नेशनल जियोग्राफिक और अन्य संस्थाओं ने सेनोटे से और पुरावस्तुएं निकालीं।
1931 की खोज: पिरामिड के भीतर एक और पिरामिड
अप्रैल 1931 में पुरातत्वविदों ने एल कैस्टिलो के भीतर एक पुराने पिरामिड की खोज की।
यह अंदर का पिरामिड 650 से 750 ईसवी के बीच का माना जाता है यानी बाहरी पिरामिड से बहुत पुराना।
अंदर के पिरामिड में मिला:
एक लाल जगुआर का सिंहासन जिसमें 74 जेड पत्थर जगुआर के धब्बों का अनुकरण करते थे। आँखें जेड की थीं और दाँत चकमक पत्थर के। एक चाक मूल (Chac Mool) की मूर्ति जिसकी आँखें सीप (nacre shell) से बनी थीं। प्रवाल, ओब्सीडियन और फ़िरोज़ा से जड़ी वस्तुएं जिनके पास मानव अवशेष भी थे।
यह खोज बताती है कि माया लोग पुराने पवित्र स्थलों के ऊपर नई इमारतें बनाते थे, न कि पुराने को नष्ट करके।
1958 की खोज: पिरामिड के नीचे एक सेनोटे और गुफा
1958 में वैज्ञानिकों ने एल कैस्टिलो पिरामिड के ठीक 15 मीटर (50 फीट) नीचे एक सेनोटे और गुफा की खोज की।
इसका अर्थ था कि माया लोगों ने जानबूझकर एक पवित्र जलकुंड के ऊपर यह पिरामिड बनाया था। उस समय संसाधनों की कमी के कारण इस खोज को आगे नहीं बढ़ाया जा सका और इसे बंद कर दिया गया।
2015 की खोज: भूमिगत सेनोटे की तकनीकी पुष्टि
2015 में UNAM (मेक्सिकन नेशनल ऑटोनोमस यूनिवर्सिटी) के भूभौतिकी संस्थान के वैज्ञानिक रेने चावेज़ और उनकी टीम ने भूमिगत रडार (Ground-Penetrating Radar) तकनीक से एल कैस्टिलो के ठीक नीचे जलभरे सेनोटे के अस्तित्व की पुष्टि की।
यह सेनोटे 20 मीटर से अधिक चौड़ा होने का अनुमान है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि माया लोगों ने जानबूझकर इस पवित्र जलस्रोत के ऊपर कुकुलकन का पिरामिड बनाया। इससे एक ब्रह्माण्डीय व्यवस्था बनती थी जिसमें पिरामिड का शीर्ष स्वर्ग, उसका आधार पृथ्वी और उसके नीचे का सेनोटे पाताल लोक का प्रतीक था।
2016 से 2017 की खोज: ओसारियो के नीचे छुपा रास्ता
2016 से 2017 के बीच शोधकर्ताओं ने ओसारियो पिरामिड के नीचे एक छुपे हुए सुरंग-रास्ते की खोज की। यह रास्ता एक दफन कक्ष से होते हुए एक अज्ञात सेनोटे तक जाता प्रतीत होता है।
सबसे रोचक बात यह है कि यह रास्ता प्राचीन माया लोगों ने खुद बंद किया था। यह अभी तक पूरी तरह खोला नहीं गया है।
2022 से 2023 की खोज: शाही आवास परिसर की पहली बार पहचान
यह हाल ही की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खोज है।
INAH (Mexico’s National Institute of Anthropology and History) के पुरातत्वविद फ्रांसिस्को पेरेज़ रुइज़ और उनकी टीम ने “चिचेन विएहो” (Chichen Viejo / Old Chichen) क्षेत्र में एक शाही आवास परिसर खोजा।
पुरातत्वविद पेरेज़ रुइज़ ने रॉयटर्स को बताया: “यह पहला आवासीय परिसर है जहाँ एक शासक अपने पूरे परिवार के साथ रहता था।”
इस नव-खोजित परिसर में शामिल हैं:
प्रवेश द्वार (Entrance Arch), घोंघों का घर (Casa de los Caracoles / House of the Snails), चंद्रमा का घर (Casa de la Luna / House of the Moon) और फैलस का महल (Palace of the Phalluses)।
साथ ही एक माया अभिजात वर्ग का मकबरा भी खोजा गया।
INAH के पुरातत्वविद जोसे ओसोरियो लेओन ने कहा: “निश्चित रूप से यहाँ अभी भी ऐसे और आवासीय परिसर हैं जो अभी तक खोजे नहीं गए।”
2022 की अन्य खोजें: पत्थर की मेज, पाइराइट डिस्क और अनुष्ठान स्थल
INAH की टीम ने एक अप्रतिबंधित हिस्से में पाँच वास्तुकला क्षेत्र, एक पत्थर की मेज और एक पाइराइट डिस्क खोजी।
पत्थर की मेज 900 से 1000 ईसवी के बीच की है। पाइराइट डिस्क 850 से 1200 ईसवी के बीच की मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाँच वास्तुकला क्षेत्रों में से चार आवासीय थे और एक अनुष्ठान स्थल।
2023 की खोजें: ट्रेन माया परियोजना के दौरान
2023 में मेक्सिको की “ट्रेन माया” (Tren Maya) रेल परियोजना की खुदाई के दौरान युकाटान प्रायद्वीप में 2,568 इमारतों के अवशेष, 202 व्यक्तिगत वस्तुएं, 244 मिट्टी के बर्तन के टुकड़े और 38 गुफाएं व सेनोटे मिले।
INAH ने यह भी घोषणा की कि चिचेन इट्ज़ा में एक नया संग्रहालय बनाया जाएगा जो नवीनतम खोजों को प्रदर्शित करेगा। साथ ही चिचेन विएहो को आम पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है।
माया कैलेंडर और खगोल विज्ञान: चिचेन इट्ज़ा की आत्मा
माया सभ्यता का खगोल विज्ञान असाधारण रूप से उन्नत था। चिचेन इट्ज़ा की हर संरचना इस ज्ञान का ठोस प्रमाण है।
माया लोग दो प्रमुख कैलेंडर उपयोग करते थे।
त्ज़ोल्किन (Tzolkin): 260 दिनों का धार्मिक कैलेंडर जो धार्मिक अनुष्ठानों और भाग्य-फल के लिए उपयोग होता था।
हाब (Haab): 365 दिनों का सौर कैलेंडर। इसमें 18 महीने थे जिनमें से प्रत्येक में 20 दिन थे और अंत में 5 “अशुभ दिन” थे।
इन दोनों कैलेंडरों का एक साथ उपयोग करके माया ने “कैलेंडर राउंड” की अवधारणा बनाई जो 52 वर्षों में एक बार पूरी होती थी। यही 52 की संख्या एल कैस्टिलो के हर पक्ष पर मिलती है।
इसके अलावा माया ने “लंबी गणना” (Long Count) कैलेंडर भी बनाया जो हजारों वर्षों की गणना करने में सक्षम था। 21 दिसंबर 2012 को माया के लंबी गणना कैलेंडर का एक बड़ा चक्र पूरा हुआ जिसे गलती से पूरी दुनिया में “दुनिया का अंत” कहकर प्रचारित किया गया था।
माया “नीला रंग”: एक रहस्यमय तकनीक
चिचेन इट्ज़ा की कला और धार्मिक अनुष्ठानों में “माया ब्लू” (Maya Blue) नामक एक अनोखे रंग का उपयोग होता था।
यह रंग नील (indigo) और एक विशेष स्थानीय मिट्टी “पैलीगोर्स्काइट” (palygorskite) के मिश्रण से बनाया जाता था। इस मिश्रण का रासायनिक बंधन इतना मजबूत था कि यह रंग सैकड़ों वर्षों बाद भी फीका नहीं पड़ता। आधुनिक वैज्ञानिकों ने इसे दुनिया के सबसे टिकाऊ रंगों में से एक बताया है।
पवित्र सेनोटे में बलि चढ़ाई जाने वाली वस्तुओं और लोगों को माया ब्लू से रंगा जाता था।
चिचेन इट्ज़ा की ध्वनि-इंजीनियरिंग: पत्थर में गूँजती आवाजें
बड़े बॉल कोर्ट की ध्वनि प्रणाली अद्भुत है। 166 मीटर दूर की फुसफुसाहट दूसरे सिरे पर सुनाई देती है।
एल कैस्टिलो के सामने ताली बजाने पर एक विशेष “चिर-चिर” जैसी आवाज़ आती है जो क्वेत्ज़ल पक्षी की आवाज़ से मिलती-जुलती है। क्वेत्ज़ल माया संस्कृति का सबसे पवित्र पक्षी था। मेक्सिकन ध्वनि इंजीनियर इग्नासियो फेले ने अपने शोध में बताया कि यह संयोग नहीं बल्कि जानबूझकर रची गई ध्वनि-वास्तुकला है।
चिचेन इट्ज़ा का भूगोल और पानी की व्यवस्था
युकाटान प्रायद्वीप में कोई बड़ी नदी नहीं है। फिर भी 50,000 लोगों के इस शहर को पानी कैसे मिलता था?
इसका जवाब है सेनोटे।
माया लोगों ने अपनी पूरी बस्ती सेनोटों के आसपास बसाई। चिचेन इट्ज़ा के पास चार प्रमुख सेनोटे थे जो शहर की पानी की जरूरत पूरी करते थे। पवित्र सेनोटे धार्मिक था जबकि दूसरे पेयजल और सिंचाई के लिए उपयोग होते थे।
2023 में UNAM के एक ताजा शोध में पाया गया कि एल कैस्टिलो पिरामिड चार प्रमुख सेनोटों के केंद्र बिंदु पर खड़ा है जैसे माया ने जानबूझकर अपने सबसे पवित्र देव के मंदिर को चारों जलस्रोतों के संगम पर बनाया हो।
स्पेनिश विजय और आधुनिक इतिहास
1526 ईसवी में स्पेनिश विजेता फ्रांसिस्को दे मोंटेजो ने युकाटान पर आक्रमण किया। उन्होंने चिचेन इट्ज़ा को अपनी अस्थायी राजधानी भी बनाया लेकिन माया प्रतिरोध के कारण पीछे हटना पड़ा।
कई शताब्दियों तक यह स्थल निजी संपत्ति रहा। 2010 में युकाटान राज्य सरकार ने इसे खरीदा और अब यह सरकारी संरक्षण में है।
मेक्सिको में 53,000 से अधिक ज्ञात पुरातात्विक स्थल हैं लेकिन केवल 193 ही जनता के लिए खुले हैं। इनमें चिचेन इट्ज़ा सर्वाधिक लोकप्रिय है जहाँ हर साल 25 लाख से अधिक पर्यटक आते हैं।
चिचेन इट्ज़ा के रोचक तथ्य
अपने चरम पर यहाँ 50,000 से अधिक लोग रहते थे। एल कैस्टिलो पिरामिड के अंदर एक और पुराना पिरामिड है और उसके नीचे एक सेनोटे है। माया ब्लू रंग सैकड़ों साल बाद भी फीका नहीं पड़ता। बॉल कोर्ट की दीवारें 166 मीटर दूर की फुसफुसाहट सुन सकती हैं। 1988 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया। 2007 में इसे दुनिया के सात नए अजूबों में चुना गया। 2008 से पिरामिड पर चढ़ना पूरी तरह प्रतिबंधित है। शहर का एक बड़ा हिस्सा अभी भी जंगल के नीचे दबा हुआ है और खुदाई जारी है। माया ट्रेन प्रोजेक्ट की खुदाई में अब तक 2,568 इमारतों के अवशेष मिले हैं।
चिचेन इट्ज़ा कैसे पहुँचें?
निकटतम हवाई अड्डा: कैनकन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा। यहाँ से बस, टैक्सी या टूर से लगभग 2.5 से 3 घंटे में चिचेन इट्ज़ा पहुँचा जा सकता है।
मेरिदा से: लगभग 1.5 से 2 घंटे की दूरी।
इसाम्माल से: लगभग 45 मिनट।
यात्रा सलाव: सुबह 9 बजे से पहले पहुँचें क्योंकि दोपहर में भीषण गर्मी होती है और भीड़ भी बढ़ जाती है। मार्च और सितंबर में विषुव के दिनों में आने पर साँप की परछाईं का अनुभव अविस्मरणीय होता है। पास में इक-किल सेनोटे (Ik Kil Cenote) भी देखें जो एक अद्भुत प्राकृतिक जलकुंड है।
निष्कर्ष: पत्थरों में जिंदा एक सभ्यता
चिचेन इट्ज़ा केवल पुरानी इमारतों का एक समूह नहीं है।
यह उन माया लोगों की जीवंत उपस्थिति है जिन्होंने हजारों साल पहले इन पत्थरों को इस तरह रखा कि वे आज भी सूरज की गति को पकड़ते हैं। जिन्होंने बिना आधुनिक यंत्रों के ऐसी वेधशाला बनाई जो ग्रहों की चाल दर्ज करती थी। जिन्होंने रेत और पत्थर में एक पूरा कैलेंडर उकेर दिया।
और सबसे अद्भुत बात यह है कि इस शहर का बड़ा हिस्सा आज भी जमीन के नीचे दबा हुआ है। INAH के पुरातत्वविद हर साल खोदते हैं और हर बार कुछ नया मिल जाता है।
जब आप एल कैस्टिलो के सामने खड़े होते हैं और उस विशाल पिरामिड को देखते हैं तो एक ही बात मन में आती है: माया लोग हमसे कहीं आगे थे और उनके रहस्य अभी भी हमें अपनी ओर बुला रहे हैं।
“चिचेन इट्ज़ा केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं है। यह उस माया ज्ञान का जीवंत मंदिर है जो समय की धूल में भी नहीं बुझा और आज भी पूरी दुनिया को अपनी ओर खींचता है।“
संदर्भ स्रोत: Britannica, UNESCO World Heritage, History.com, Smithsonian Magazine, INAH Mexico, Ancient Origins, Wikipedia, Yucatan Today, CNN Travel, National Geographic